समय से पहले बड़े होते बच्चे …

सामान्य
आरी आजा निन्दियाँ की थपकियों से नही सोते बच्चे …न ही जागो मोहन प्यारे की भैरवी सुनकर खोलतें है आँखें ….ये अपनी उम्र से बड़े हो रहे हैं …महानगरों में नही होती ऐसी माएं जिनके आँचल में प्यार दुलार पाते हो ये बच्चे ……घर के नाम पर एक धरमशाला है जहाँ सभी सोते हैं रात में …पति पत्नी सुबह से ही चले जाते हैं काम पर …घर में रखी कामवाली करती है बच्चों की फिकर ..या बस  उतनी ही फिकर जितने के पैसे मिलते है उसे ….इनकी पूरी दुनिया होती है इनके कमरे में ….खूब बड़ी बड़ी किताबे जिसमे बने होते है भविष्य के सपनों वाली तस्वीरे ..ये अपने आप को पाते हैं उनमें …इनके पास कुछ नंबर होते हैं …जैसे आस पड़ोस के किसी अंकल आंटी के ..कभी जरुरत पड़ने पर ये उन्हें मदद को बुला सकते हैं …..कुछ और नंबर हैं जिसका उपयोग ये हमेशा करतें हैं ..जैसे पिज़्ज़ा बर्गर वाली दुकानों के नम्बर ….नही चाहिए इन्हें मां के हाथ का बना गाजर का हलवा ……
 
कभी नही खेलते है छुप्पम छुपाई …लंगड़ी …भागो पकड़ो जैसे   भूले बिसरे खेल …इनके हाथों  में रफ़्तार वाले खेलों का खिलोना होता है ….कम्पूटर पर स्ट्रीट फाइटर वाले खेलों की जानकारी ..इनकी आखें गड़ी होती हैं अपने सामने की स्क्रीन पर जिसपर भागती हैं गाड़ियाँ एक दुसरे को पछाडती …..
 
कितनी कम संवेदना बची है ..मुझे तकलीफ होती है जब मैं देखती हूँ इन्हें इनकी उम्र से ज्यादा बड़ा …जरा से ज्यादा बड़े बच्चे अपनी पढाई अपने कोचिंग को लेकर दिनरात परेशां रहते हैं …..इन बच्चो की भी प्राइवेसी होती है …हमे मना कर देते हैं ये अपने कमरे में आने से …अपने दोस्तों से बातें करते हुए इशारे से हमे हट जाने को कहते ….हमारे बचपन की बातों को ऐसे सुनते हैं जैसे कितना बोर कर रहे हैं हम उन्हें ….plz मम्मा और भी काम है मुझे तुम जाओ ….जिन माँ बाप के पास समय नही है वो इन्हें समय समय पर पैसे देते हैं …और जो माँ बाप देते है अपना समय ये बच्चे उसे हस्तछेप मानतें हैं …
 
कितना कुछ बदल गया …जिसके बिना एक दिन नही रही वो बच्चा करता है विदेश में जाने की बात ..उसे अपना भविष्य बनाना है …और हमारा भविष्य ?
 
रिश्तो में बचाएं रखना है जो असर तो हमे बताना होगा जीवन मूल्य।।करना होगा अवगत अपनी संस्क्रती से .
.दिखानी होगी वो दुनिया जिनमे हम जीना चाहते हैं …इन्हें रफ़्तार में खोने से पहले बचा लेना होगा ..मन की ..रिश्तों की ..अपनों के दिल की गति के साथ मिलाना होगा ताल ..क्या नहीं  बचाना चाहते हम इन्हें ?
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