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आला रे आला गणपति आला ….

सामान्य

पूरा शहर इसी रंग में रंग हुआ है …जिधर देखों उधर सजा हुआ है पंडाल …बरस भर बाद आये गणपति के स्वागत में 

तैयार है पूरा बाजार …स्कूलों में छुट्टियाँ है ….शहर  की सभी बिल्डिंग से आ रही है आरती की आवाज…सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता

विंघनाची….

 

                     सब खुश हैं प्रभु आपके आने से ..नवरतन बैंड ..स्वागत बैंड और भी बैंड वाले ..किशना ने भी बना लिया 

है तीन लडको के साथ मिलकर एक बैंड …तीनों को काम मिलता है इन दस दिनों में …कमाल है ना एक बरस अपनी जिंदगी को जैसे तैसे बिताने वाले बिना किसी शिकायत लगे है आपके आगमन और विसर्जन की तैयारी में ..जरा जरा सी बात पर 

खुश होते है लोग ..आप कभी देखिये इनकी आँखों में इतने बड़े सपने भी नही होते कई बार ये तो बस जीना चाहते है ..पर टूट जाते है प्रभु ….आपकी तो दिव्यदृष्टी है ना देखा ही होगा आपने ..आबिद संतोष रघु काका ये सब शहर में बनने वाले कई 

पंडालों में करते रहें है काम …सधे  है इनके हाथ बल्लियों को संभालने सीधा रखने और डरावनी उचाईयों तक जाकर पंडालों को भव्य बनाने  में …पर ये बिचारे मेहनत के सभी काम जानते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी जिंदगी को बचाए हुए  हैं ..ये भी खुश है …कुछ दिनों कुछ पैसे आते रहेंगे …कुछ रंग ये भी देख पाएंगे शायद …

अरे हाँ तमाम बच्चों की तरफ से भी मैं आपका आभार मानती हूँ  देवा ..वो जो रस्ते पर सारा दिन बिन माँ बाप के बिखरे रहते थे ..गाड़ियों की तेज रफ़्तार से ना डरते हुए मांगते रहे पैसे अपनी जिंदगी को रेंगते हुए बचा लेने की चाहत में वो खुश है इन दिनों …कहीं भी किसी भी पंडाल के आस पास मंडराते रहते है अभी माँगने के लिए जान की बाजी  नही लगानी  पड़ती ..दया भाव वाले लोग कुछ ना कुछ दे ही देते हैं ….

 

तो बात इतनी सी है की सब खुश है …आपके आने और जाने तक बहुतों की जिंदगी की गाड़ी सरकेगी जरा ठीक ठाक से …बाद में तो वही रोना काम नही..पैसा नही..रहने को जगह नही …बीमारी है पर इलाज नही….बचा सकते थे पर बचा नही पाए …

औरतों के चेहरे से भी रंगत गायब …कामवालियां भी मुस्कराती रही थी इन दिनों ….बड़े छोटे पंडाल में मेहनत करने वाला वो छोटा आदमी हमेशा छोटा ही क्यों रहता है भगवान?

शहर भरा है तुम्हारे भक्तों से …गरीबी भी वैसे ही भरी पूरी है ..लाचारी भी है …कुछ बदलता नही ..आपकी कृपा के आसरे रहते हैं सब.. आप देखते तो हैं पर …कई बार लगता है कुछ लोगों पर नही रहती नजर जो भूखे सो जाते है ..जो अपनी दस रुपये की कमाई से आपको दो रुपये की माला रोज चढ़ाता है …जो दर्द में भी आपका नाम पुकारता है ..सब खोने पर भी आपको पाने की कामना करता है ..उन्हें अकेला क्यों छोड़ देते है ?ये दस दिनों की खुशी जरा बढा नही सकते ….बच्चे मुस्कराते हुए कितने अच्छे लगते है …….

 

सबसे मोहक है आपका विसर्जन ..ये जोर जोर से ढोल नगाड़े की आवाज …ये धूम …ये पटाखे …रंग बिरंगे कपड़ों में लोग 

पीढे पर आपको अपने हाथों में उठाये नंगे पैर समंदर की ओर जाते हुए ..आपसे फिर आने का वादा लेते देते हुए ….और तमाम टोलियों में नाचते लोग ….जिस रस्ते से गुजरते झोपडियों के बच्चे नाचने को मचल उठते …सब आकर नाच रहे हैं …

आप विदा हों रहे हैं आँखें नम भी होती है …एक लाडला मेहमान चला जाये तो कितना सुना लगता है सब बिलकुल वैसा …सभी पंडालों से आप विदा हों रहे हैं एक एक कर …मजदूर वही बल्ली खोलने वाले रस्सिया लपेटने वाले …गाली धक्का खाते काम निपटाते …आपके आने की राह निहारते रहेंगे ….

 

समंदर में आपको विसर्जित कर आये ….तो आप क्या सचमें चले जाते हैं?नही देखते पलट के भी ..की पीछे रघु काका का घर कैसे चल रहा है…किसना बैंड वाले तीनों लड़के बेबसी में भी पिटते है नगाडा कई बार.. की रियाज कर रहे है …उनके खालीपन की आवाज क्या सच में नही पहुचती आपतक ???

 

आइये ना गणपति बप्पा कुछ ज्यादा दिन की खुशी लेकर की खुश रहे तमाम छोटे बड़े लोग पंडाल में बस सजे भर रहने से क्या फायदा ..बाहर देखिए भी दुनियाँ कैसी हुई पड़ी है …सबके लिए खुशियाँ रुकी रहें.. पेट भरे हों सबके.. घर के सपने पूरे करने ..मासूमों को प्यार माँ बाप घर का सूख देने पर भी विचार करिये ना एक बार …

 

गणपति बप्पा मोरया ..पुढच्या बरसी लॉकर या ….

आपको शत शत नमन ………